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18 July, 2015

मेडिटेशन क्या है


मेडिटेशन क्या है और किस प्रकार करना उचित है. अक्सर लोग मेडिटेशन के नाम से घबरा जाते हैं. वह सोचते हैं कि मेडिटेशन के लिए उन्हें घंटों बैठना पड़ेगा. शायद वे अपना ध्यान ना लगा पाएँ. शायद वे समाधी में ना बैठ पायें. मेडिटेशन लोगों के लिए केवल ऋषि मुनि द्वारा की हुई एक क्रिया है. ये सच नहीं है. ज़रूरी नहीं की मेडिटेशन के लिए हमें पद्मासन में ही बैठना पड़े. आज हम आपको बताएँगे की किस प्रकार आप भिन्न भिन्न तरीके से मेडिटेशन कर सकते हैं दिन भर के तनाव से मुक्ति पा सकते हैं. पहला तरीका तो है आसान. सुख आसान में बैठ कर, केवल अपने मन को शांत करें. अपनी श्वास की ओर ध्वान एकग्रित करें. अपने विचारों को इधर उधर विचलित ना होने दें. यदि आपको लगे कि अनेक ख़याल दिल और दिमाग़ में रहे हैं तो भी परेशान ना हों. शुरू शुरू में यह बिल्कुल अपेक्षित है. जैसे छोटा बच्चा माँ की उँगली छुड़i के भाग जाता है और माँ फिर से उसे दौड़ के पकड़ लेती है, ठीक उसी तरह भागते हुए विचारों को एकाग्र कर के फिर से ध्यान लगायें. शुरू में कठिन होगा. फिर धीरे धीरे मान एवम् मस्तीक्ष शांत होते चले जाएँगे. यह तो था सबसे साधारण एवं सामान्य तरीका. अब बात करते हैं कुछ हट कर तरीकों की. जिनके बारे में बहुत कम लिखा और पड़ा गया है. कुछ ऐसे तरीके भी हैं जिनसे आप खेल खेल में ही ऐसे ध्यान लगा पायेंगे और आपको ग्यात भी नहीं होगा. चीन में बहुत प्रचलित है ताई ची. इसको चलता फिरता मेडिटेशन मान सकते हैं आप. इसके करने से भी आपको मेडिटेशन के बहुत फ़ायदे  मिलते हैं. ऐसे ही ज़ेन मेडिटेशन बहुत मशहूर है. एक और है गाइडेड मेडिटेशन. इसमें आपके प्रशिक्षक धीरे धीरे आपका ध्यान आपके शरीर के एक एक अंग की ओर केंद्रित करते हैं. फिर आपको शांति का अनुभव प्रतीत होने लगता है. अब हम बात करते हैं एक बहुत ही असामान्या तरीके की. क्या आप जानते हैं की नृत्या के माध्यम से भी आप मेडिटेट कर सकते हैं. टैंगो अर्जेंटीना का नृत्या है. इसे दो लोग मिल कर एक साथ करते हैं. कहा जाता है की जब यह दो लोग एक साथ होते हैं तो वे बिल्कुल ऐसे होते हैं जैसे चार पैरों का एक जानवर. उनका ध्यान एकदम एकाग्र होता है. वे एक दूसरे की दिल की धड़कन भी महसूस कर रहे होते हैं. वे ना केवल एक दूसरे के साथ बल्कि इस सृष्टि के साथ एक हो जाते हैं. मैं स्वयं टैंगो करती हूँ. मैं योग की प्रशिक्षक भी हूँ. जिस प्रकार का अनुभव मैने टैंगो में किया, वो मैने कभी किसी भी ध्यान में नहीं किया. इससे आपका मन मस्तीक्ष, श्वास, आत्मा सभी शांत प्रसन्न हो उठते हैं. यह एक अद्भुत शैली है. भारती भंगड़ा, गिदडा, डांडिया और तो और फिल्मी गानों पर नाचते हैं. परंतु इस अदभुद शैली से अग्यात हैं. यही नहीं, दो इस्त्री पुरुष इतनें समीप कर कैसे एक साथ चल सकते हैं, यह उनके लिए अचंभे की बात है.
परंतु जैसे एक तैराक ही जानता है की पानी का मज़ा क्या है. वो मज़ा पानी के . बैठे हुए व्यक्ति के लिए अंजान  है. पानी के बाहर बैठ कर, केवल देखता हुआ व्यक्ति तैराक के अनुभव से विचलित है. इसी प्रकार, जब तक आप टैंगो स्वयं नहीं करेंगे, नहीं जान पाएँगे की कितना अनोखा एवं अनूठा है यह अनुभव. एक बार  डुबकी  लगा के तो देखिए.


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